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मसाला पाक और गुजराती घरों की सर्दियों वाली वसाणा परंपरा
हर सर्दी गुजराती रसोइयाँ घी, गोंद और सोंठ की ख़ुशबू से महक उठती हैं, क्योंकि घर-घर वसाणा बनता है। मसाला पाक क्या है, इसमें क्या पड़ता है और इसे कैसे खाया जाता है — यहाँ पढ़िए।
बहुत से गुजराती घरों में सर्दी कैलेंडर से नहीं, बल्कि उस दिन से शुरू होती है जब कोई बड़ी कड़ाही, घी का डिब्बा और गोंद की थैली निकालता है। उसी दिन वसाणा बनता है, और कई परिवारों में इस सूची में सबसे ऊपर होता है मसाला पाक।
वसाणा क्या है?
वसाणुं (बहुवचन वसाणा) सर्दियों की शुरुआत में बनने वाली और पूरी ठंड भर खाई जाने वाली घी-मसाले से भरपूर चीज़ों का गुजराती नाम है। आमतौर पर इन्हें एक-दो बड़े बैच में बनाकर स्टील के डिब्बों में भर लिया जाता है, और लगभग नवंबर से फ़रवरी तक थोड़ा-थोड़ा खाया जाता है।
जाने-माने वसाणा में ये शामिल हैं:
- मसाला पाक — गोंद, सूखे मेवे और गुड़ के साथ मसालों से भरपूर
- अड़दिया पाक — उड़द के आटे और घी से बना
- मेथी पाक — मेथी वाला, उनके लिए जिन्हें हल्की कड़वाहट पसंद है
- गोंद पाक — गोंद को केंद्र में रखकर बना
- खजूर पाक — खजूर और सूखे मेवों की मिठाई
ये चीज़ें परंपरागत रूप से सर्दियों में गर्माहट और ऊर्जा के लिए खाई जाती हैं, और इनके नुस्ख़े किताबों में नहीं, बल्कि दादी-माँ के हाथों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते हैं।
मसाला पाक क्या है?
मसाला पाक एक गाढ़ी, ख़ुशबूदार सर्दियों की मिठाई है, और जैसा नाम से ज़ाहिर है, इसमें असली भूमिका मसाले की है। जहाँ अड़दिया उड़द के आटे पर टिका है, वहीं मसाला पाक मसालों, गोंद और मेवों के मिश्रण को गुड़ और घी से बाँधकर बनता है।
एक आम मसाला पाक में ये होता है:
- सोंठ (सूखी अदरक का पाउडर)
- गोंद, घी में तलकर फुलाया हुआ
- गंठोड़ा / पीपरामूल पाउडर
- सूखे मेवे — बादाम, काजू, पिस्ता, कभी-कभी सूखा नारियल
- घी और गुड़
- जायफल, इलायची, काली मिर्च और कभी-कभी जावित्री जैसे गरम मसाले
कुछ घरों में बाँधने के लिए थोड़ा गेहूँ का आटा या खोया मिलाया जाता है; कुछ लोग इसे लगभग सिर्फ़ मसालों और मेवों से ही बनाते हैं। स्वाद मिट्टी जैसा, हल्की गर्माहट देने वाला और बहुत ज़्यादा मीठा नहीं।
वसाणा के मौसम की यादें
किसी भी गुजराती से वसाणा के बारे में पूछिए, एक क़िस्सा ज़रूर मिलेगा। पूरा घर भुनते घी की ख़ुशबू से भर जाना। दादी का ज़िद करना कि गोंद को "हँसने तक" तला जाए — यानी फूलकर सफ़ेद होने तक। बच्चों को मेवे तोड़ने का काम मिलना, और आधे मेवे खा जाने पर डाँट पड़ना। पड़ोसन का अपने वसाणे की स्टील की प्लेट भेजना, और प्लेट का हमारे वसाणे से भरकर लौटना।
वसाणा घर से दूर रहने वाले रिश्तेदारों को भी भेजा जाता था। विदेश में बसे बहुत से गुजरातियों के लिए सूटकेस में रखा मसाला पाक का डिब्बा ही घर की सर्दी का स्वाद है।
लोग कितना खाते हैं?
मसाला पाक काफ़ी भरपूर होता है, इसलिए इसे थोड़ी मात्रा में ही खाया जाता है। सबसे आम आदत है सुबह गरम दूध के गिलास के साथ एक छोटा टुकड़ा, कभी-कभी सैर पर जाने से पहले। यह पूरे मौसम में धीरे-धीरे लुत्फ़ उठाने वाली सर्दियों की मिठाई है, प्लेट भरकर खाने वाली चीज़ नहीं।
मसाला पाक को कैसे रखें
- एयरटाइट डिब्बे में ठंडे कमरे के तापमान पर रखें।
- नमी से दूर रखें; हमेशा सूखे चम्मच या सूखे हाथ से निकालें।
- सर्दियों में यह आमतौर पर 3–4 हफ़्ते अच्छा रहता है।
मसाला पाक के बारे में झटपट जवाब
मसाला पाक कब बनाया जाता है? आमतौर पर सर्दियों की बिल्कुल शुरुआत में, नवंबर के आसपास, ताकि पूरी ठंड चले।
क्या मसाला पाक बहुत मीठा होता है? आमतौर पर यह ज़्यादातर मिठाइयों से कम मीठा होता है। मसाले और मेवे आगे रहते हैं, गुड़ पीछे से साथ देता है।
DeshÉ मसाला पाक कैसे बनाता है
DeshÉ में हम जामनगर की अपनी घरेलू रसोई में मसाला पाक वैसे ही बनाते हैं जैसे हमारे अपने घर में बनता था: घी में फूलने तक तला गोंद, ताज़ा पिसी सोंठ और गंठोड़ा, भरपूर सूखे मेवे, और ठीक सही तार तक पका गुड़ — ताकि पाक अच्छे से जमे पर खाने में नरम लगे। हम इसे सिर्फ़ सर्दियों के महीनों में, छोटे बैच में बनाते हैं। साथ में अड़दिया और खजूर पाक भी बनाते हैं, ताकि आप अपना वसाणा डिब्बा ख़ुद तैयार कर सकें। इस हफ़्ते क्या तैयार है, जानने के लिए हमें एक पूछताछ भेजिए।
वसाणा सर्दियों की शुरुआत में बनने और पूरी ठंड थोड़ा-थोड़ा खाए जाने वाले घी-मसाले वाले गुजराती व्यंजन हैं — जैसे मसाला पाक, अड़दिया और मेथी पाक।
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